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Saarthi Baidyanath
kise jannat milegi ya kise dozakh milega
kise jannat milegi ya kise dozakh milega | किसे जन्नत मिलेगी या किसे दोज़ख़ मिलेगा
- Saarthi Baidyanath
किसे
जन्नत
मिलेगी
या
किसे
दोज़ख़
मिलेगा
इसे
भी
तय
ज़मीं
पर
रहने
वाले
कर
रहे
हैं
- Saarthi Baidyanath
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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हो
गई
है
पीर
पर्वत
सी
पिघलनी
चाहिए
इस
हिमालय
से
कोई
गंगा
निकलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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मेरे
ऊपर
कहानी
लिख
रहे
हो
तो
पहले
जान
तो
लो
कौन
हूँ
मैं
Saarthi Baidyanath
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अब
न
रंजो
मलाल
रक्खेंगे
सामने
हर
सवाल
रक्खेंगे
तुम
हमारा
ख़याल
रखते
हो
हम
तुम्हारा
ख़याल
रक्खेंगे
नौनिहालों
को
शे'र
कहने
दो
शा'इरी
का
जमाल
रक्खेंगे
हाल
जो
है
उसे
छुपाना
क्या
हाल
जो
है
सो
हाल
रक्खेंगे
हम
न
होंगे
अगर
ज़माने
में
सब
हमारी
मिसाल
रक्खेंगे
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Saarthi Baidyanath
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शा'इरी
में
पनाह
लेता
हूँ
अपने
सर
ये
गुनाह
लेता
हूँ
Saarthi Baidyanath
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तुम्हारी
ओर
से
हम
दूर
तुमको
लगते
हैं
हमारी
ओर
से
बिल्कुल
क़रीब
लगते
हो
Saarthi Baidyanath
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अलग
सब
सेे
तबीअत
है
करें
क्या
मुझे
बुत
से
मोहब्बत
है
करें
क्या
दु'आ
में
मौत
मेरी
मांगते
हैं
सितमगर
की
शरारत
है
करें
क्या
बदन
संदल
निग़ाहें
शबनमी
हैं
क़सम
से
वो
क़यामत
है
करें
क्या
मैं
आदत
शा'इरी
की
छोड़
देता
मगर
दिल
की
ज़रूरत
है
करें
क्या
कोई
भी
डुगडुगी
सुनकर
न
आया
मदारी
को
शिकायत
है
करें
क्या
सनम
ने
रख
लिया
है
मुझको
दिल
में
न
मरने
की
इजाज़त
है
करें
क्या
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Saarthi Baidyanath
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