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Saarthi Baidyanath
maayusi aur gham men thoda antar hai
maayusi aur gham men thoda antar hai | मायूसी और ग़म में थोड़ा अन्तर है
- Saarthi Baidyanath
मायूसी
और
ग़म
में
थोड़ा
अन्तर
है
आँसू
और
शबनम
में
थोड़ा
अन्तर
है
- Saarthi Baidyanath
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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आख़िर
में
यूँँ
हुआ
कि
मिरी
मात
हो
गई
मैं
उसके
साथ
थी
जो
ज़माने
के
साथ
था
Parul Singh "Noor"
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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शब
की
आग़ोश
में
महताब
उतारा
उस
ने
मेरी
आँखों
में
कोई
ख़्वाब
उतारा
उस
ने
Azm Shakri
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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शिकारी
से
बचने
में
कैसा
कमाल
निशाने
पे
रहना
बड़ी
बात
है
Shariq Kaifi
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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है
कोई
और
जो
अंबर
में
है
साँवला
चाँद
मेरे
घर
में
है
ख़त
कबूतर
से
जो
भिजवाया
है
तब
से
ये
जान
कबूतर
में
है
जब
भी
मिलना
हो
पलट
देता
हूँ
हर
मुलाक़ात
कैलेंडर
में
है
साथ
मैं
दूँ
तो
भला
किसका
दूँ
हुस्न
और
इश्क़
बराबर
में
है
ग़म
नहीं
है
कि
मुयस्सर
है
ग़म
इक
ख़ज़ाना
तो
मुक़द्दर
में
है
तू
समय
है
न
तेरा
ओर
न
छोर
तू
सदी
में
है
तू
पल-भर
में
है
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Saarthi Baidyanath
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अँधेरे
को
अँधेरा
बोलना
आता
नहीं
तुमको
तो
फिर
ऐ
दोस्त
उजाले
को
उजाला
कैसे
बोलोगे
Saarthi Baidyanath
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उसके
मेरे
दरमियाँ
अब
आशिक़ी
वैसी
नहीं
है
बात
कम
होती
है
पर
नाराज़गी
वैसी
नहीं
है
आप
को
क्या
लग
रहा
है
मैं
मज़े
में
हूँ
यहाँ
आप
जैसा
सोचते
हैं
ज़िन्दगी
वैसी
नहीं
है
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Saarthi Baidyanath
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उजाले
में
नुमायां
है
जहाँ
लेकिन
उजाला
ख़ुद
नहीं
दिखता
उजाले
में
Saarthi Baidyanath
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कुछ
काम-धाम
है
ही
नहीं
और
क्या
करें
दिन-रात
सुब्हो-शाम
चलो
मशविरा
करें
Saarthi Baidyanath
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