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Saarthi Baidyanath
ek aurat maashooq bhale ho sakti hai
ek aurat maashooq bhale ho sakti hai | एक औरत माशूक़ भले हो सकती है
- Saarthi Baidyanath
एक
औरत
माशूक़
भले
हो
सकती
है
आशिक़
होना
उसके
बस
की
बात
नहीं
- Saarthi Baidyanath
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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दिल-ए-सोज़ाँ
को
भी
महका
रहे
हैं
हमें
जो
ख़्वाब
तेरे
आ
रहे
हैं
तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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अगरचे
इश्क़
में
मजनू
बड़े
बदनाम
होते
हैं
अगरचे
क़ैस
जैसे
आशिक़ों
के
नाम
होते
हैं
भटक
सकती
नहीं
जंगल
में
लैला
चाह
करके
भी
अजी
लैला
को
घर
में
दूसरे
भी
काम
होते
हैं
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Gagan Bajad 'Aafat'
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हम
उसके
दिल
में
रहते
हैं
सो
अच्छे
हैं
वगरना
दोस्त
अदाओं
से
तो
'आशिक़
को
वो
ज़िंदा
मार
देती
है
Ankit Maurya
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तुमने
जब
से
अपनी
पलकों
पर
रक्खा
कालिख़
को
सब
काजल
काजल
कहते
हैं
इश्क़
में
पागल
ही
तो
होना
होता
है
पागल
हैं
जो
मुझको
पागल
कहते
हैं
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Vishal Bagh
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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कभी
चल
कर
रुके
होंगे,
कभी
रुक
कर
चले
होंगे
अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी
में
वो
जाने
कब
ढले
होंगे
सियाही
बे-सबब
आँखों
के
साहिल
पर
नहीं
आती
यक़ीनन
चश्मे-आतिश
में
कई
'आशिक़
जले
होंगे
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Wajid Husain Sahil
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कुछ
तो
पढ़ने
के
लिए
और
कुछ
पढ़ाने
के
लिए
इस
तरह
से
वक़्त
ने
सारी
किताबें
बाँट
दीं
Saarthi Baidyanath
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सरफिरी
पड़
गई
मेरे
पीछे
नकचढ़ी
पड़
गई
मेरे
पीछे
लाख
बोला
कि
मैं
विवाहित
हूँ
मनचली
पड़
गई
मेरे
पीछे
क्या
पता
मैंने
क्या
बिगाड़ा
है
ज़िन्दगी
पड़
गई
मेरे
पीछे
मैं
नदी
हूँ
न
मैं
समुंदर
हूँ
तिश्नगी
पड़
गई
मेरे
पीछे
जबसे
हल्ला
हुआ
मैं
हूँ
शाइर
शा'इरी
पड़
गई
मेरे
पीछे
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Saarthi Baidyanath
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जितना
जलना
है
जलें
हम
सेे
ये
जलने
वाले
हम
फ़क़त
चाहने
भर
से
नहीं
मरने
वाले
Saarthi Baidyanath
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गली
से
उसके
जब
गुजरूँ
शरारत
आ
ही
जाती
है
वही
सिहरन
वही
तड़पन
हरारत
आ
ही
जाती
है
Saarthi Baidyanath
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चाँद
सा
महबूब
मेरे
पास
है
मैं
सितारों
से
मुहब्बत
क्या
करूँँ
Saarthi Baidyanath
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