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Saarthi Baidyanath
eeshwar dena vardaan ha
eeshwar dena vardaan ha | ईश्वर देना वरदान हमें अभिमान बनें इक-दूजे का
- Saarthi Baidyanath
ईश्वर
देना
वरदान
हमें
अभिमान
बनें
इक-दूजे
का
फिर
साथ
धरा
पर
आकर
हम
पहचान
बनें
इक-दूजे
का
- Saarthi Baidyanath
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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हमारी
शा'इरी
में
और
क्या
है
हमारा
तजरबा
है
फ़लसफ़ा
है
Saarthi Baidyanath
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नहीं
तुम
रूठते
हो
रूठने
सा
मनाने
जैसा
फिर
हम
क्यूँँ
मनायें
Saarthi Baidyanath
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इंतिज़ार
इंतिज़ार
है
तो
है
एतिबार
एतिबार
है
तो
है
छोड़
कर
मुझको
सिर्फ़
इक
वो
चाँद
हिज़्र
का
राज़दार
है
तो
है
बावला
दिल
मेरी
तो
सुनता
नहीं
आपका
इख़्तियार
है
तो
है
मैं
हूँ
नादाँ
अगर
तो
हूँ
तो
हूँ
वो
अगर
होशियार
है
तो
है
दीद
का
लुत्फ़
हो
गया
हासिल
अब
नज़र
कर्ज़दार
है
तो
है
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Saarthi Baidyanath
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ज़िन्दगी
ले
रही
मज़े
मेरी
मैं
मज़े
ज़िन्दगी
के
ले
रहा
हूँ
Saarthi Baidyanath
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अजब
ही
दौर
था
ज़ालिम
ग़ज़ल
की
नब्ज़
चलती
थी
मेरी
पलकें
उठाने
से
तेरी
पलकें
झुकाने
से
Saarthi Baidyanath
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