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Saarthi Baidyanath
ajab hi daur tha zaalim ghazal ki nabz chalti thii
ajab hi daur tha zaalim ghazal ki nabz chalti thii | अजब ही दौर था ज़ालिम ग़ज़ल की नब्ज़ चलती थी
- Saarthi Baidyanath
अजब
ही
दौर
था
ज़ालिम
ग़ज़ल
की
नब्ज़
चलती
थी
मेरी
पलकें
उठाने
से
तेरी
पलकें
झुकाने
से
- Saarthi Baidyanath
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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पूछे
हैं
वजह-ए-गिरिया-ए-ख़ूनी
जो
मुझ
सेे
लोग
क्या
देखते
नहीं
हैं
सब
उस
बे-वफ़ा
का
रंग
Meer Taqi Meer
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मैं
क़त्ल
तो
हो
गया
तुम्हारी
गली
में
लेकिन
मिरे
लहू
से
तुम्हारी
दीवार
गल
रही
है
Javed Akhtar
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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उसकी
तस्वीरें
हैं
दिलकश
तो
होंगी
जैसी
दीवारें
हैं
वैसा
साया
है
एक
मैं
हूँ
जो
तेरे
क़त्ल
की
कोशिश
में
था
एक
तू
है
जो
जेल
में
खाना
लाया
है
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Tehzeeb Hafi
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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एक
बेरोज़गार
होने
से
यह
तो
अच्छा
है
आप
लेखक
हैं
Saarthi Baidyanath
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छाँव
देगा
वही
शजर
जिसने
धूप
को
सर
पे
ओढ़
रक्खा
हो
Saarthi Baidyanath
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आशिक़ों
के
नगर
में
रहते
हो
यानि
मिट्टी
के
घर
में
रहते
हो
Saarthi Baidyanath
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कई
मर्ज़
जो
कभी
लाइलाज
लगते
थे
सही
वक़्त
है
उनका
इलाज
करने
का
Saarthi Baidyanath
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हम
अपनी
ज़िन्दगी
के
किरदार
में
जमें
हैं
क़ीमत
नहीं
है
लेकिन
बाज़ार
में
जमें
हैं
Saarthi Baidyanath
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