zoom na keejo shamma-roo bazm ke soz o saaz par | ज़ोम न कीजो शम्अ-रू बज़्म के सोज़ ओ साज़ पर

  - Saail Dehlvi
ज़ोमकीजोशम्अ-रूबज़्मकेसोज़साज़पर
रखियोनज़रबजा-ए-नाज़ख़ातिर-ए-पीर-ए-नाज़पर
ज़ेबनहींहैशैख़येमय-कश-ए-पाक-बाज़पर
तोहमतेंसौलगाएगादाग़-ए-जबींनियाज़पर
कहताहूँहरहसींसेमैंनियत-ए-इश्क़हैमिरी
आएगामेरादिलमगरशाहिद-ए-दिल-नवाज़पर
फ़र्क़हयातमर्गकामुर्ग़-ए-चमनकेदिलसेपूछ
देताहैफ़ौक़दामकोचंगुल-ए-शाह-बाज़पर
ख़्वाब-ए-लहदहैपुर-सुकूँअहद-ए-हयातपुर-अलम
मौतक्यूँँहोताना-ज़नज़िंदगी-ए-दराज़पर
संग-ए-दर-ए-हबीबपरहोताहूँसज्दा-रेज़मैं
ख़ल्क़-ए-ख़ुदाहैमो'तरिज़मुझपेमिरीनमाज़पर
मुनइम-ए-बे-बसरयूँँहीदेखिएता-कुजारहे
महव-ए-नशातख़ुश-दिलीनग़्मा-ए-तार-ए-साज़पर
फ़ख़्र-ए-अमलचाहिएसई-ए-अमलज़रूरहै
आँखरहेलगीहुईरहमत-ए-कारसाज़पर
दरपेबुतोंकेदीसदा'स़ाएल'-ए-बे-नवानेये
फ़ज़्ल-ए-ख़ुदारहेमुदामहाल-ए-गदा-नवाज़पर
  - Saail Dehlvi
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