kisi bhi vaham ko KHud par sawaar mat karna | किसी भी वहम को ख़ुद पर सवार मत करना

  - Saadullah Shah
किसीभीवहमकोख़ुदपरसवारमतकरना
ख़याल-ए-यारकोगर्द-ओ-ग़ुबारमतकरना
ख़िलाफ़-ए-वाक़िआ'कुछभीहोसुनसुनालेना
यहीतरीक़ामगरइख़्तियारमतकरना
तुम्हारीआँखमेंनफ़रतहोदूसरोंकेलिए
तुमअपनीज़ातसेइतनाभीप्यारमतकरना
नशाचढ़ाहैतोफिरयेउतरभीजाएगा
जोहैसुरूरतोइसकोख़ुमारमतकरना
कोईभीरुतहोवोअपनाजमालरखतीहै
ख़िज़ाँजोआएतोइसकोबहारमतकरना
ग़मोंकेसाथतोजीनाहैउम्रभरकेलिए
ख़ुशीकेसाथतोउनकोशुमारमतकरना
किसीकोजानकेअंजानबनकेमिलना'साद'
किसीकेसाथभीयेज़ुल्मयारमतकरना
  - Saadullah Shah
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