kaha kis ne ki marna qaid se gham ki nikalna hai | कहा किस ने कि मरना क़ैद से ग़म की निकलना है

  - Saadat Nazeer
कहाकिसनेकिमरनाक़ैदसेग़मकीनिकलनाहै
अजलतोइकहयात-ए-इश्क़कापहलूबदलनाहै
फ़क़तसय्यादहीकाडरनहींअहल-ए-नशेमनको
अभीबर्क़-ए-बलाकीज़दसेभीबचकरनिकलनाहै
लब-ए-साहिलपहुँचनेकीख़ुशीकैसीअभीदिल
तलातुम-ख़ेज़तूफ़ानोंसेटकराकरनिकलनाहै
अभीइनइब्तिदाईमुश्किलोंपररंज-ओ-ग़मकैसा
हमेंतोवर्ता-ए-बहर-ए-हवादिसहीमेंपलनाहै
बलासेहक़-बयानीपरसज़ामिलतीहैभुगतेंगे
हमेंभीसरमद-ओ-मंसूरहीकीराहचलनाहै
भलातुममस्लहतइसज़ब्त-ए-सोज़-ए-ग़मकीक्याजानो
जोफूंकेंज़ुल्मकेख़िरमनकोवोशो'लेउगलनाहै
येरस्म-ए-मय-कदाहैगाहमस्तीगाहहुश्यारी
सँभलकरगिरचुकेअबगिरकेफिरहमकोसँभलनाहै
वोहोंगेऔरजोफूलोंकीसेजोंपरहैंख़्वाबीदा
हमेंदूरी-ए-मंज़िलअभीकाँटोंपेचलनाहै
  - Saadat Nazeer
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