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Rudransh Trigunayat
gham ha
gham ha | ग़म हमें औलाद का है ग़ैर से शिकवा नहीं
- Rudransh Trigunayat
ग़म
हमें
औलाद
का
है
ग़ैर
से
शिकवा
नहीं
अब
तुम्हें
हम
क्या
बताएं
क्या
परेशानी
हुई
- Rudransh Trigunayat
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दुखे
हुए
लोगों
की
दुखती
रग
को
छूना
ठीक
नहीं
वक़्त
नहीं
पूछा
करते
हैं
यारों
वक़्त
के
मारों
से
Vashu Pandey
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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ये
काम
दोनों
तरफ़
हुआ
है
उसे
भी
आदत
पड़ी
है
मेरी
Shariq Kaifi
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मैं
तो
मुद्दत
से
ग़ैर-हाज़िर
हूँ
बस
मेरा
नाम
है
रजिस्टर
में
याद
करती
हैं
तुझको
दीवारें
शक्ल
उभर
आई
है
पलस्तर
में
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Azhar Nawaz
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ज़िंदगी
है
या
कोई
तूफ़ान
है
हम
तो
इस
जीने
के
हाथों
मर
चले
Khwaja Meer Dard
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आँख
में
पानी
रखो,
होंटों
पे
चिंगारी
रखो
ज़िंदा
रहना
है
तो
तरकीबें
बहुत
सारी
रखो
Rahat Indori
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इस
का
अपनी
ही
रवानी
पर
नहीं
है
इख़्तियार
ज़िंदगी
शिव
की
जटाओं
में
है
गंगा
की
तरह
Ayush Charagh
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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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जवानी
में
चमक
है
वो
बुढ़ापे
का
सहारा
है
ख़ुदी
को
देखता
जिस
में
वही
बेटा
हमारा
है
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Rudransh Trigunayat
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काँटों
की
महफ़िल
में,
हम
फूल
कहाँ
जाएँगे
तेरी
उस
चाहत
को,
हम
भूल
कहाँ
पाएँगे
Rudransh Trigunayat
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आँख
भर
देख
सब
पहचान
लेती
है
माँ
बिना
बोले
ही
सब
जान
लेती
है
Rudransh Trigunayat
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बातें
नहीं
करनी
मुझे
यार
फिर
भी
उस
शख़्स
ने
बातों
में
उलझा
रखा
है
Rudransh Trigunayat
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ज़ख़्म
खाए
हुए
पुराने
,पर
लौट
आए
मगर
बुलाने
पर
वो
भटकती
बग़ैर
यादों
के
है
ख़ुशी
आ
गई
ठिकाने
पर
लौट
चलते
मगर
कहाँ
जाएँ
याद
जाती
नहीं
भुलाने
पर
कोशिशें
रायगाँ
हुईं
मेरी
तुम
नहीं
आ
सकी
बुलाने
पर
नौकरी
कर
रहे
दिनों
दिन
हम
जल
गए
लोग
मुस्कुराने
पर
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Rudransh Trigunayat
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