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Rehan Umar
apni khidki se jhaankti hai vo jab
apni khidki se jhaankti hai vo jab | अपनी खिड़की से झाँकती है वो जब
- Rehan Umar
अपनी
खिड़की
से
झाँकती
है
वो
जब
रौशनी
सी
गली
में
होती
है
- Rehan Umar
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किसी
गली
में
किराए
पे
घर
लिया
उसने
फिर
उस
गली
में
घरों
के
किराए
बढ़ने
लगे
Umair Najmi
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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एहसान
तेरा
पिछला
चुकाया
नहीं
गया
मुश्किल
में
अबकी
बार
बुलाया
नहीं
गया
मैं
तुझ
सेे
मिलने
आ
गया
हूँ
तेरे
शहर
तक
और
तुझ
सेे
रेलगाड़ी
तक
आया
नहीं
गया
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Tanoj Dadhich
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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ये
मयकशों
का
तवाज़ुन
भी
क्या
तवाज़ुन
है
खड़े
भी
रहना
सहूलत
से
लड़खड़ाना
भी
हमारे
शहर
के
लोगों
को
ख़ूब
आता
है
किसी
को
सर
पे
बिठाना
भी
और
गिराना
भी
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Imran Aami
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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ये
सोच
कर
के
वो
खिड़की
से
झाँक
ले
शायद
गली
में
खेलते
बच्चे
लड़ा
दिए
मैंने
Unknown
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दिल
मुझे
उस
गली
में
ले
जा
कर
और
भी
ख़ाक
में
मिला
लाया
Meer Taqi Meer
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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जो
इसको
मज़हब
से
जोड़े
ये
उसकी
नादानी
है
उर्दू
का
कोई
धर्म
नहीं
है
उर्दू
हिंदुस्तानी
है
Rehan Umar
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जिस
जगह
से
इधर
उधर
हुए
हम
रोज़
जाता
है
उस
जगह
कोई
Rehan Umar
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अब
तो
तारीफ़
के
बँधेंगे
पुल
माँ
ने
छेड़ी
हैं
लाल
की
बातें
Rehan Umar
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नीड
जिसकी
है
वो
नहीं
मौजूद
अच्छे
मौसम
का
क्या
करे
कोई
Rehan Umar
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उस
सेे
मिल
के
आ
रहे
हैं
हम
खिले
से
आ
रहे
हैं
उसने
आँखें
चूम
ली
हैं
ख़्वाब
अच्छे
आ
रहे
हैं
किसके
पीछे
चल
पड़ा
हूॅं
लोग
पीछे
आ
रहे
हैं
जॉब
सरकारी
लगी
है
अच्छे
रिश्ते
आ
रहे
हैं
आज
घर
में
सिर्फ़
तुम
हो
हम
तो
मिलने
आ
रहे
हैं
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Rehan Umar
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