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Rehan Umar
usse mil ke aa rahe hain
usse mil ke aa rahe hain | उस सेे मिल के आ रहे हैं
- Rehan Umar
उस
सेे
मिल
के
आ
रहे
हैं
हम
खिले
से
आ
रहे
हैं
उसने
आँखें
चूम
ली
हैं
ख़्वाब
अच्छे
आ
रहे
हैं
किसके
पीछे
चल
पड़ा
हूॅं
लोग
पीछे
आ
रहे
हैं
जॉब
सरकारी
लगी
है
अच्छे
रिश्ते
आ
रहे
हैं
आज
घर
में
सिर्फ़
तुम
हो
हम
तो
मिलने
आ
रहे
हैं
- Rehan Umar
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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इश्क़
कहता
है
भटकते
रहिए
और
तुम
कहते
हो
घर
जाना
है
Madan Mohan Danish
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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अपनी
खिड़की
से
झाँकती
है
वो
जब
रौशनी
सी
गली
में
होती
है
Rehan Umar
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तोहफ़े
देते
ही
रहते
हो
रेहान
तुम
भी
कुछ
उस
सेे
पा
रहे
हो
क्या
Rehan Umar
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पूरी
कर
तब
उसकी
माँग
जब
वो
भर
दे
तेरी
माँग
Rehan Umar
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जिस
जगह
से
इधर
उधर
हुए
हम
रोज़
जाता
है
उस
जगह
कोई
Rehan Umar
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हमें
अपनी
नहीं
परवाह
कोई
पड़ोसी
बढ़
रहा
है
गड़
रहा
है
Rehan Umar
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