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Rizwan Khoja "Kalp"
ped gin kaatee thii raahen
ped gin kaatee thii raahen | पेड़ गिन काटी थी राहें
- Rizwan Khoja "Kalp"
पेड़
गिन
काटी
थी
राहें
ख़र्च
गिन
कर
कट
रही
है
अम्न
की
उम्मीद
में
हैं
और
नफ़रत
बट
रही
है
- Rizwan Khoja "Kalp"
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हमारी
मौत
पर
बेशक़
ज़माना
आएगा
रोने
मगर
ज़िंदा
हैं
जब
तक
चैन
से
जीने
नहीं
देगा
Astitwa Ankur
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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ये
मुझे
चैन
क्यूँँॅं
नहीं
पड़ता
एक
ही
शख़्स
था
जहान
में
क्या
Jaun Elia
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मुसीबतों
में
तो
याद
करते
ही
हैं
किसी
को
ये
लोग
सारे
मगर
कभी
जो
सुकूँ
में
आए
ख़याल
मेरा
तो
लौट
आना
Hasan Raqim
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सब
से
पुर-अम्न
वाक़िआ
ये
है
आदमी
आदमी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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अब
आ
भी
जाओ
के
सुकूंँ
मिले
मुझे
अगर
जो
जाना
था
तो
क्यूँँंँ
मिले
मुझे
ज़माना
हो
न
हो
रकी़ब
बीच
में
तू
अब
कभी
मिले
तो
यूँंँ
मिले
मुझे
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Faiz Ahmad
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सिवाए
तालियों
के
कुछ
नहीं
मिलता
ग़ज़लगोई
फ़क़त
धंधा
सुकूँ
का
है
Neeraj Neer
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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थकना
भी
लाज़मी
था
कुछ
काम
करते
करते
कुछ
और
थक
गया
हूँ
आराम
करते
करते
Zafar Iqbal
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माह
यूँँ
ही
गुज़रता
तिरी
याद
में
ईद
के
चाँद
सी
है
मुहब्बत
तिरी
Rizwan Khoja "Kalp"
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शाना-ब-शाना
हैं
खड़े
दर
पे
तिरे
छोटा
बड़ा
कोई
नहीं
दरबार
में
Rizwan Khoja "Kalp"
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आप
ही
अनजान
हैं
मेरे
पते
से
याद
को
मालूम
घर
का
रास्ता
है
Rizwan Khoja "Kalp"
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इश्क़
कर
के
रोज़
उस
में
तू
जला
कर
कोई
मंज़िल
ही
नहीं
बस
तू
चला
कर
सोचता
हूँ
दर्द
अपने
फूँक
डालूँ
जिस्म
तेरा
सर्द
रातों
में
जला
कर
साहिब-ए-मसनद
ग़ुलामी
चाहते
हैं
शाह
वाले
सर
झुका
के
अब
चला
कर
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Rizwan Khoja "Kalp"
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यारों
का
यार
था
वो
दिल
की
पुकार
था
वो
मयख़ाने
का
था
साक़ी
महफ़िल
बहार
था
वो
हम
दर्द
था
सभी
का
गो
राज़दार
था
वो
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Rizwan Khoja "Kalp"
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