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Ritesh Rajwada
ek kissa tha mar gaya saaheb
ek kissa tha mar gaya saaheb | एक क़िस्सा था मर गया साहेब
- Ritesh Rajwada
एक
क़िस्सा
था
मर
गया
साहेब
आज
का
दिन
गुज़र
गया
साहेब
दिल
किसी
ताख
पर
रखा
होगा
रखने
वाला
किधर
गया
साहेब
एक
मुद्दत
पे
आँख
झपकी
थी
ख़्वाब
आँखों
से
डर
गया
साहेब
- Ritesh Rajwada
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कोहरा
तो
इस
उदासी
का
घना
है
और
सबका
दिल
भी
पत्थर
का
बना
है
रोने
से
मन
हल्का
होता
होगा
लेकिन
मैं
तो
लड़का
हूँ,
मुझे
रोना
मना
है
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Daqiiq Jabaali
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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ऐसा
लगता
है
कि
तन्हाई
मुझे
छूती
है
उँगलियाँ
कौन
फिरोता
है
मेरे
बालों
में
Ashok Mizaj Badr
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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कोई
समझे
नहीं
बतियाँ
हमारी
बड़ी
दिक्कत
में
हैं
खुशियाँ
हमारी
किसी
की
ख़ुशबुओं
के
कर्ज
में
हैं
कई
शा
में
कई
रतियाँ
हमारी
हमें
उम्मीद
थी
कुछ
तो
कहेगा
वो
चुप
से
सुन
रहा
बतियाँ
हमारी
सभी
ख़्वाबों
ने
मिलकर
झूठ
बोला
सो
आख़िर
थक
गईं
अखियाँ
हमारी
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Ritesh Rajwada
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सब
कुछ
पा
कर
थोड़ा
सा
कुछ
कम
भी
रहता
है
इन
ख़ुशियों
में
एक
तुम्हारा
ग़म
भी
रहता
है
Ritesh Rajwada
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तुम्हारे
साथ
जो
देखे
थे
मैंने
वो
सारे
ख़्वाब
बाग़ी
हो
रहे
हैं
Ritesh Rajwada
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पराई
बाँह
में
रातें
बिताकर
जब
कभी
दिन
में
हमें
टीवी
पे
देखोगे
तो
सोचो
कितना
रोओगे
Ritesh Rajwada
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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