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Raushan miyaa'n
kaan saaghar kamar kya shikhar ho gaii
kaan saaghar kamar kya shikhar ho gaii | कान साग़र कमर क्या शिखर हो गई
- Raushan miyaa'n
कान
साग़र
कमर
क्या
शिखर
हो
गई
और
कहते
हैं
जूँ
तूँ
बसर
हो
गई
साँझ
से
टाँग
पकड़े
था
परछाई
की
फिर
कहा
चाँद
ने
चल
सहर
हो
गई
डाल
जाते
हैं
लौंडे
कई
फिर
यहाँ
एक
लड़की
नहीं
डाक-घर
हो
गई
पहले
बर्बाद
थोड़ी
थी
'रौशन'
मियाँ
जब
से
शाइर
बने
ख़ास
कर
हो
गई
- Raushan miyaa'n
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जो
तक़दीर
लिखा
सो
होवे
फिर
तदबीर
की
पर्वा
कैसी
Raushan miyaa'n
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छीन
लेगी
कोई
डायन
मुझ
से
माँ
कहती
मुझे
तुझ
को
काला
रंग
थोड़ा
कम
पहनना
चाहिए
Raushan miyaa'n
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तुझे
देख
कर
यार
क्या
होता
है
पता
है
तुझे
सब
पता
होता
है
बहुत
ख़ूब
है
ये
तरीक़ा
मगर
परेशान
करना
बुरा
होता
है
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Raushan miyaa'n
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मोहब्बत
में
ग़ालिब
कि
रौशन
मियाँ
हम
हुए
यार
अल्ताफ़
हाली
है
जैसे
Raushan miyaa'n
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इस
वजह
से
उछल
रहा
हूँ
मैं
ना-समझ
था
सँभल
रहा
हूँ
मैं
हार
जाता
हूँ
चलने
से
जिस
को
फिर
वही
चाल
चल
रहा
हूँ
मैं
थाम
ले
हाथ
कोई
अब
मेरा
आदमी
हूँ
फिसल
रहा
हूँ
मैं
मुझको
ख़ुद
पे
यक़ीं
नहीं
होता
दिन-ब-दिन
जूँ
बदल
रहा
हूँ
मैं
आपको
कुछ
ख़याल
भी
है
मिरा
आप
के
पीछे
चल
रहा
हूँ
मैं
एक
ख़्वाहिश
के
वास्ते
'रौशन'
एक
ख़्वाहिश
कुचल
रहा
हूँ
मैं
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Raushan miyaa'n
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