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Raj Tiwari
lautaa use ya zehan se mere use utaar de
lautaa use ya zehan se mere use utaar de | लौटा उसे या ज़ेहन से मेरे उसे उतार दे
- Raj Tiwari
लौटा
उसे
या
ज़ेहन
से
मेरे
उसे
उतार
दे
मेरे
ख़ुदा
मुझे
ज़रा
सा
तो
सुकून
उधार
दे
- Raj Tiwari
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एक
तख़्ती
अम्न
के
पैग़ाम
की
टांग
दीजे
ऊंचे
मीनारों
के
बीच
Aziz Nabeel
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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हम
रातों
को
उठ
उठ
के
जिनके
लिए
रोते
हैं
वो
ग़ैर
की
बाँहों
में
आराम
से
सोते
हैं
Hasrat Jaipuri
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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फूलों
की
सेज
पर
ज़रा
आराम
क्या
किया
उस
गुल-बदन
पे
नक़्श
उठ
आए
गुलाब
के
Adil Mansuri
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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निगाहों
के
तक़ाज़े
चैन
से
मरने
नहीं
देते
यहाँ
मंज़र
ही
ऐसे
हैं
कि
दिल
भरने
नहीं
देते
हमीं
उन
से
उमीदें
आसमाँ
छूने
की
करते
हैं
हमीं
बच्चों
को
अपने
फ़ैसले
करने
नहीं
देते
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Waseem Barelvi
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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नद्दी
झरने
और
समुंदर
सूख
गए
खिड़की
दरवाज़े
हर
इक
दर
सूख
गए
एक
करिश्मा
जो
कि
हमारे
साथ
हुआ
आप
इस
तरह
हमारे
अंदर
सूख
गए
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Raj Tiwari
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मिरी
जगह
कोई
और
उसकी
जगह
कोई
और
कहानी
तो
नहीं
बदली
बदल
गए
किरदार
Raj Tiwari
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ज़मीं
पर
घर
बनाकर
देखते
हैं
आसमाँ
की
ओर
परिंदों
की
तरह
इंसान
भी
पिंजरे
में
रहते
हैं
Raj Tiwari
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उसे
अब
भूल
कर
तू
उस
की
यादों
से
किनारा
कर
ये
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
मुहब्बत
तू
दुबारा
कर
Raj Tiwari
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हवा
जब
भी
उसे
छू
कर
गुज़रती
है
वो
ख़ुशबू
बन
के
फूलों
पर
बिखरती
है
Raj Tiwari
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