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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
pahle qaabil banaaenge ye haath
pahle qaabil banaaenge ye haath | पहले क़ाबिल बनाएँगे ये हाथ
- Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
पहले
क़ाबिल
बनाएँगे
ये
हाथ
फिर
तेरे
हाथ
पे
रखेंगे
हाथ
हमने
क्या
तेरे
दर
को
खोलना
था
बस
निशाँ
के
लिए
लगाए
हाथ
तू
ज़बाँ
खोल
कुछ
क़दम
तो
उठा
कब
तलक
यूँँ
उठेंगे
उसके
हाथ
चाँद
तुझको
पकड़
तो
लेते
हम
पर
वहाँ
तक
नहीं
पहुँचते
हाथ
तूने
ही
भीड़
को
नहीं
देखा
वर्ना
मैंने
हिलाए
तो
थे
हाथ
तुम
भी
ले
आओ
कुछ
हया
ख़ुद
में
हम
ही
कब
तक
धरेंगे
आँख
पे
हाथ
मान
ले
है
जुदाई
क़िस्मत
में
छोड़
दे
अब
दिखाने
अपने
हाथ
जब
ज़रूरत
है
तो
अकेले
हैं
क्या
करें
था
में
ही
पराए
हाथ
याद
बे-होशी
की
वो
ही
है
मुझे
जब
जबीं
पे
रखा
था
माँ
ने
हाथ
- Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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गर
बाज़ी
इश्क़
की
बाज़ी
है,
जो
चाहो
लगा
दो
डर
कैसा
गर
जीत
गए
तो
क्या
कहना,
हारे
भी
तो
बाज़ी
मात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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मुझे
अब
तुम
से
डर
लगने
लगा
है
तुम्हें
मुझ
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
Jaun Elia
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डर
हम
को
भी
लगता
है
रस्ते
के
सन्नाटे
से
लेकिन
एक
सफ़र
पर
ऐ
दिल
अब
जाना
तो
होगा
Javed Akhtar
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भूचाल
की
धमकी
का
अगर
डर
है
तो
लोगों
इन
कच्चे
मकानों
को
गिरा
क्यूँ
नहीं
देते
Gyan Prakash Vivek
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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खिलौना
आपका
है
जैसे
खेलो
बस
इतना
सोचना
प्यारा
बना
है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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ये
हम
जो
हँस
रहे
हैं
बेबसी
पर
हमारा
तंज़
है
इस
ज़िंदगी
पर
हुआ
ऐसा
अमावस-रात
थी
वो
और
अपने
को
यक़ीं
था
चाँदनी
पर
नज़र
तो
हम
भी
आ
जाते
उसे
जो
बराबर
रौशनी
पड़ती
सभी
पर
नए
तो
हैं
यक़ीनन
इसलिए
आप
भरोसा
कर
रहे
हैं
ख़ुद-कुशी
पर
अभी
जीवन
से
तू
महरूम
है
यार
तभी
इतरा
रहा
है
मय-कशी
पर
सितम
अब
ये
है
वो
लौट
आया
है
और
हमारा
आ
गया
है
दिल
किसी
पर
किसी
से
तुम
मोहब्बत
कर
लो
वर्ना
सवाल
उठता
रहेगा
दोस्ती
पर
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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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क्या
मोहब्बत
में
ये
सही
था
यार
जी
से
मैं
जी-हुज़ूरी
पे
आया
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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ख़्वाब
ही
ने
जगाए
रक्खा
है
वर्ना
आदम
तो
सो
चुका
होता
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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मेरे
यार
के
सर
जंगल
का
साया
है
और
मैं
एक
लकड़हारे
का
बेटा
हूँ
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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