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Atul K Rai
hamse poochho hansne ki keemat sahab
hamse poochho hansne ki keemat sahab | हम सेे पूछो हँसने की कीमत साहब,
- Atul K Rai
हम
सेे
पूछो
हँसने
की
कीमत
साहब,
चुप्पी
ओढ़े
घण्टों
रोना
पड़ता
है!
- Atul K Rai
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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सभी
के
साथ
दिखना
भी
मगर
सब
सेे
जुदा
रहना
भी
है
उसको
उदासी
साथ
भी
रखनी
है
और
तस्वीर
में
हँसना
भी
है
उसको
Kafeel Rana
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एक
दुख
ये
के
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
के
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
Tehzeeb Hafi
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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ज़ुदा
हम
हो
गए
अफ़सोस
कैसा
फ़लक
धरती
से
कब
लिपटा
दिखा
है
Atul K Rai
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ज़रा
धैर्य
रखिए
सघन
वन
दिखेगा
ये
पेड़ों
के
पत्ते
गिराने
के
दिन
हैं
Atul K Rai
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बहारें
हों
या
वीरानी
से
सब
जंगल
गुज़रते
हैं
रुदन
हो
हास्य
हो
सबको
बराबर
बाँटता
है
वो
Atul K Rai
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प्रश्न
चश्में
पर
खड़ा
कर
दे
रही
आपकी
मौजूदगी
भी
ख़ूब
है
Atul K Rai
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उसके
पास
दवा
है
हर
बीमारी
की
वो
चाहे
तो
इक
पल
में
चंगा
कर
दे
कलियुग
को
भी
एक
कन्हैया
चहिए
जो
नंगा
करने
वालों
को
नंगा
कर
दे
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Atul K Rai
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