ye sard raatein bhi ban kar abhii dhuaan ud jaayen | ये सर्द रातें भी बन कर अभी धुआँ उड़ जाएँ

  - Rahat Indori
येसर्दरातेंभीबनकरअभीधुआँउड़जाएँ
वोइकलिहाफ़मैंओढूँतोसर्दियाँउड़जाएँ
ख़ुदाकाशुक्रकिमेरामकाँसलामतहै
हैंउतनीतेज़हवाएँकिबस्तियाँउड़जाएँ
ज़मींसेएकत'अल्लुक़नेबाँधरक्खाहै
बदनमेंख़ूननहींहोतोहड्डियाँउड़जाएँ
बिखरबिखरसीगईहैकिताबसाँसोंकी
येकाग़ज़ातख़ुदाजानेकबकहाँउड़जाएँ
रहेख़यालकिमज्ज़ूब-ए-इश्क़हैंहमलोग
अगरज़मीनसेफूंकेंतोआसमाँउड़जाएँ
हवाएँबाज़कहाँआतीहैंशरारतसे
सरोंपेहाथरक्खेंतोपगड़ियाँउड़जाएँ
बहुतग़ुरूरहैदरियाकोअपनेहोनेपर
जोमेरीप्याससेउलझेतोधज्जियाँउड़जाएँ
  - Rahat Indori
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