दर्द बिखरी ख़्वाहिशों का सिसकियाँ कहने लगीं

  - Ragini Preet
दर्दबिखरीख़्वाहिशोंकासिसकियाँकहनेलगीं
बाँधदोउधड़ेसिरेफिरडोरियाँकहनेलगीं
चुपहैंलबदिलबे-ख़बरआँखोंमेंहैकोईनशा
हाल-ए-दिलकीदास्ताँबेचैनियाँकहनेलगीं
काफ़िलातारोंकाजगजातातेरीआहटकोसुन
तूफ़लककाचाँदहैरानाइयाँकहनेलगीं
उड़गयाफ़रज़ंदख़ालीघोंसलाबसरहगया
कौनहैपंछीतेरातन्हाइयाँकहनेलगीं
पसलियोंमेंजेठकीकुछधूपहर-ख़ूजज़्बकर
पूसफिरसेझेलनाहैसर्दियाँकहनेलगीं
  - Ragini Preet
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