तहलीलमौसमोंमेंकरकेअजबनशासा
फैलाहुआहैहर-सूकुछदिनसेरत-जगासा
मिलतेहैंरोज़उनसेहसरतकीसरहदोंपर
रहताहैफिरभीहाइलक्यूँँजानेफ़ासलासा
बरसोंकेसबमरासिमतोड़ेहैंउसनेऐसे
पलभरमेंटूटजाएजिसतरहआइनासा
ताज़ारफ़ाक़तोंकेपुर-कैफ़सिलसिलोंमें
रहताहैदिलनजानेअबक्यूँँडराडरासा
मेरीबलासेचाहतकीलाखबारिशेंहों
मैंपहलेभीथाप्यासामैंआजभीहूँप्यासा
दोनोंमेंआजतकवोपहलीसीतिश्नगीहै
फिरवस्लमेंनहींक्यूँँवोलुत्फ़इब्तिदासा
तन्हाइयोंकीज़दमेंरहतीहैरूहमेरी
इसवास्तेहूँयारोमैंआजकलबुझासा
टकरागएजोउनसेहमराहमेंअचानक
इकदास्ताँहुईफिरवोहादसाज़रासा
जिसपरनिगाहठहरीजान-ए-'ख़याल'अपनी
वोअजनबीहैलेकिनलगताहैआश्नासा