raah zid ki na ikhtiyaar karo | राह ज़िद की न इख़्तियार करो

  - Rafeeq Anjum
राहज़िदकीइख़्तियारकरो
सच्चीबातोंपेए'तिबारकरो
अपनेबलपरकरोजोकरनाहो
क्यूँकिसीपरतुमइंहिसारकरो
मुश्किलेंज़िंदगीमेंआतीहैं
ग़मसेख़ुदकोहम-कनारकरो
हरवजूद-ए-बशरघुटनमेंहै
कुछफ़ज़ाओंकोख़ुश-गवारकरो
इज़्ज़त-ओ-क़द्रपाँवचूमेगी
अपनेअख़्लाक़उस्तुवारकरो
दास्ताँहैअभीतवीलबहुत
जाओघरकलकाइंतिज़ारकरो
फ़ाएदाभीहैइससेक्या'अंजुम'
मेरेज़ख़्मोंकोमतशुमारकरो
  - Rafeeq Anjum
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