khwaahish-e-wasl ne ushshaq ko rusva rakha | ख़्वाहिश-ए-वस्ल ने उश्शाक़ को रुस्वा रक्खा

  - Raeesuddin Tahoor Jafri
ख़्वाहिश-ए-वस्लनेउश्शाक़कोरुस्वारक्खा
हुस्ननेदिलकश-ओ-ख़ुश-रंगसरापारक्खा
अपनेकिरदारकेदाग़ोंकोछुपानेकेलिए
मेरेआमालपेतन्क़ीदकोबरपारक्खा
मेरेना-कर्दागुनाहोंकीनुमाइशकेलिए
मुझकोज़िंदाँमेंलगाकरबड़ातालारक्खा
साफ़इंकारकरनेकेबदलज़ालिमने
मेरीदिल-बस्तगीकोवादा-ए-फ़र्दारक्खा
कौनसीचीज़गिरानीकीबुलंदीपेनहीं
ख़ून-ए-नाहक़मगरइसदौरनेसस्तारक्खा
करकेमहरूमउन्हेंआब-ए-रवाँसेहमने
नामबे-आबगुज़रगाहोंकादरियारक्खा
अपनेक़दसेमिराक़ददेखानिकलताजो'तुहूर'
करकेसरमेराक़लमअपनासरऊँचारक्खा
  - Raeesuddin Tahoor Jafri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy