yuñ bhi guzri hain mirii shaam-o-sehar paani men | यूँँ भी गुज़री हैं मिरी शाम-ओ-सहर पानी में

  - Raees Narvi
यूँँभीगुज़रीहैंमिरीशाम-ओ-सहरपानीमें
अश्कबनबनकेबहाख़ून-ए-जिगरपानीमें
क्याडराएँगेयेआफ़ात-ए-ज़मानाहमको
हमबनालेतेहैंजबराह-ए-सफ़रपानीमें
सख़्तसेसख़्तभीपत्थररहाफिरपत्थर
अक्सरआयाहैनज़रऐसाअसरपानीमें
तुमइसीतौरमिरेदिलमेंरहाकरतेहो
जिसतरहरहताहैपोशीदागुहरपानीमें
जज़्बा-ए-शौक़-ओ-तसव्वुरकीबदौलतअक्सर
देखतारहताहूँमैंअक्स-ए-क़मरपानीमें
ख़्वाहिश-ए-ऐश-ओ-तरबक्यूँँहोज़मानेकीउसे
ज़िंदगीहोतीरहीजिसकीबसरपानीमें
रौशनीदेतीवोकैसेरह-ए-उल्फ़तपे'रईस'
शम-ए-उम्मीदजलाईथीमगरपानीमें
  - Raees Narvi
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