ham kahaan aur dil-e-kharaab kahaan | हम कहाँ और दिल-ए-ख़राब कहाँ

  - Raees Akhtar
हमकहाँऔरदिल-ए-ख़राबकहाँ
शब-ए-ग़मतिराजवाबकहाँ
ज़िंदगीकेशुऊ'रसेबढ़कर
ज़िंदगीमेंकोईअज़ाबकहाँ
कोईचेहराहोग़ौरसेपढ़िए
इससेजा
में'कोईकिताबकहाँ
दर्द-ओ-ग़मकीउदासआँखोंमें
आरज़ूकेहसीनख़्वाबकहाँ
आओअपनीसहरसपूछतोलें
छोड़आईहैआफ़्ताबकहाँ
रूहजबहोगईहैख़ुदघाइल
दिलकेज़ख़्मोंकाफिरहिसाबकहाँ
दिलधड़कतेहैंअबमगरदिलमें
वोमहकतेहुएगुलाबकहाँ
क्यापतावक़्तकेअँधेरोंमें
छपगएफ़नकेमाहताबकहाँ
वक़्तठहराहुआसालगताहै
रुकगयाकेइंक़लाबकहाँ
'रईस'आरज़ूकेचेहरेपर
अबवोअगलीसीआब-ओ-ताबकहाँ
  - Raees Akhtar
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