मैंक़लमसेकाग़ज़परअपनादिलबनाऊँगा
औरफिरतेरादिलभीमुत्तसिलबनाऊँगा
बैठकरकेसाहिलकीतपतीरेतपरयारों
उँगलियोंसेइकदरियामुश्तइलबनाऊँगा
इश्क़अपनेहिस्सेकाबाँटकरकिसीऔरको
मैंतेरीमोहब्बतकोमुन्तक़िलबनाऊँगा
रातदिनतेरीज़ुल्फ़ेंजोहवामेंउड़तीहैं
इनकोअपनेहाथोंसेमुस्तक़िलबनाऊँगा
हँसतेहँसतेलोगोंकोमैंपुरानीग़ज़लोंसे
हरकिसीकोअबकीमैंमुज़्महिलबनाऊँगा