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Rachit Sonkar
zara-zara sa main mar raha hooñ
zara-zara sa main mar raha hooñ | ज़रा-ज़रा सा मैं मर रहा हूँ
- Rachit Sonkar
ज़रा-ज़रा
सा
मैं
मर
रहा
हूँ
तुम्हारे
दिल
से
उतर
रहा
हूँ
क़सम
तो
खाई
थी
मैने
फिर
भी
मैं
उसके
दर
से
गुज़र
रहा
हूँ
कोई
तो
मुट्ठी
में
बाँधे
मुझको
कि
रेत
जैसा
बिखर
रहा
हूँ
तुम्हीं
हो
ख़ुशबू
तुम्हीं
फ़ज़ा
हो
मैं
तुम
सेे
मिल
कर
निखर
रहा
हूँ
हमेशा
सच
ही
कहाँ
है
मैंने
इसी
लिए
मैं
अखर
रहा
हूँ
मिली
नहीं
है
नज़र
अभी
तक
मैं
तुम
सेे
मिलने
को
मर
रहा
हूँ
- Rachit Sonkar
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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दर-ब-दर
ढूँढ़
रहे
हैं
जिसे
अरसे
से
हम
शख़्स
वो
मेरी
ही
आँखों
में
छिपा
बैठा
है
Harsh saxena
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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राम
होने
में
या
रावण
में
है
अंतर
इतना
एक
दुनिया
को
ख़ुशी
दूसरा
ग़म
देता
है
हम
ने
रावण
को
बरस
दर
बरस
जलाया
है
कौन
है
वो
जो
इसे
फिर
से
जनम
देता
है
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Kumar Vishwas
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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इस
दर
का
हो
या
उस
दर
का
हर
पत्थर
पत्थर
है
लेकिन
कुछ
ने
मेरा
सर
फोड़ा
हैं
कुछ
पर
मैं
ने
सर
फोड़ा
है
Zubair Ali Tabish
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हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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ग़म
ग़ज़ल
में
ही
सुनाना
देखो
शा'इरी
का
है
ज़माना
देखो
मेरे
हाथों
में
है
पायल
उसकी
है
मेरे
पास
ख़ज़ाना
देखो
बात
धरती
की
गगन
तक
पहुँची
इक
हक़ीक़त
का
फ़साना
देखो
ज़ुल्फ़
खोली
है
हवा
में
उसने
अब्र
का
झूम
के
आना
देखो
उसने
आँखों
में
लगाया
सुरमा
इसको
कहते
है
लुभाना
देखो
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Rachit Sonkar
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तस्वीर
उस
की
देख
कर
आए
कहीं
अब
सब
हमें
मजनूँ
समझ
कर
जा
रहे
Rachit Sonkar
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मेरा
कोई
झगड़ा
नहीं
तुम
से
मियाँ
छूना
नहीं
उस
की
कोई
तस्वीर
बस
जागीर
सारी
तुमको
दे
देंगे
मगर
मत
माँगना
तुम
मुझ
सेे
मेरी
हीर
बस
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Rachit Sonkar
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मुझ
पर
बिछा
रही
है
अपने
बदन
की
चादर
मेरे
बदन
को
उसने
बिस्तर
बना
दिया
है
Rachit Sonkar
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आज
सारी
हदों
से
गुज़र
जाए
हम
तुम
से
वा'दा
करे
और
मुकर
जाए
हम
देख
कर
तुमको
बस
देखते
रह
गए
दिल
किया
तेरी
बाहों
में
मर
जाए
हम
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Rachit Sonkar
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