zindagi men ab mujhko kuchh mazaa nahin aata | ज़िंदगी में अब मुझको कुछ मज़ा नहीं आता

  - Rachit Sonkar
ज़िंदगीमेंअबमुझकोकुछमज़ानहींआता
एकभीमेरेहक़मेंफ़ैसलानहींआता
मुझकोयेबतातीहैइससड़ककीख़ामोशी
इससड़कपेकोईभीक़ाफ़िलानहींआता
चलतेचलतेआयाहूँउसजगहपेमैंयारों
जिसजगहनज़रकोईरास्तानहींआता
मुझकोअपनीकमियोंकाकुछपतानहींचलता
सामनेअगरमेरेआइनानहींआता
यादवोअगरहमकोयारअबनहींकरता
यादअबहमेंभीवोबा-ख़ुदानहींआता
कररहाहूँमैंकोशिशइकग़ज़लसुनानेकी
परग़ज़लसुनानेकाक़ायदानहींआता
  - Rachit Sonkar
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