mere lab par hañsi jo aayi hai | मेरे लब पर हँसी जो आई है

  - Qamar Siwani
मेरेलबपरहँसीजोआईहै
वोभीअपनीनहींपराईहै
क्याभरोसाकरेवोफूलोंपर
जिसनेख़ुशबूसेचोटखाईहै
मानलीहारउसनेबादलसे
येतोसूरजकीजग-हँसाईहै
बंदहैंसारीखिड़कियाँघरकी
हवातूकिधरसेआईहै
बिजलियोंकोसज़ादेबादल
आगतोबर्फ़नेलगाईहै
क्याकिसीकोदिखाएमुँहतूफ़ाँ
मातउसनेदिएसेखाईहै
ज़मींतूकूदनाइसमें
चाँदसूरजकीवोलड़ाईहै
प्याससेबाततककीउसने
येतोदरियाकीकज-अदाईहै
'क़मर'मेरीएकएकग़ज़ल
मेरेतख़्ईलकीकमाईहै
  - Qamar Siwani
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