khu | ख़ुदी के बाग़ के फूलों की ताज़गी हूँ मैं

  - Qamar Siwani
ख़ुदीकेबाग़केफूलोंकीताज़गीहूँमैं
बहार-ए-हुस्न-ए-तमद्दुनकीदिलकशीहूँमैं
ज़मीर-ए-ज़र्फ़हूँतहज़ीब-ए-आजिज़ीहूँमैं
मिज़ाज-ए-सब्र-ओ-तहम्मुलकीसादगीहूँमैं
चाँदहूँसिताराचाँदनीहूँमैं
चराग़-ए-अज़्मत-ए-ग़ैरतकीरौशनीहूँमैं
सुलगतीधूपकीख़ातिरहूँछाँवराहतकी
अदबकीख़ुश्कज़मींकेलिएनमीहूँमैं
ख़ुलूसवालेकोपहचानतानहींकोई
नईसदीकीनिगाहोंमेंअजनबीहूँमैं
किसीअमीरकाएहसाँलियामैंनेकभी
ख़ुदीकोनाज़हैजिसपरवोआदमीहूँमैं
अमीर-ए-शहरसमेराकोईलगावनहीं
ग़रीब-ए-शहरसनिस्बतहैमुफ़्लिसीहूँमैं
वफ़ाकेगहरेसमुंदरसेमेरारिश्ताहै
'क़मर'ख़ुलूसकीबहतीहुईनदीहूँमैं
  - Qamar Siwani
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