main apne paanv badhaaun magar kahaan aage | मैं अपने पाँव बढ़ाऊँ मगर कहाँ आगे

  - Qamar Siddiqi
मैंअपनेपाँवबढ़ाऊँमगरकहाँआगे
ज़मीनख़त्महुईअबहैआसमाँआगे
हरएकमोड़पेमैंपूछताहूँउसकापता
हरएकशख़्सयेकहताहैबसवहाँआगे
बिछड़तेजातेहैंअहबाबख़्वाबकीसूरत
गुज़रताजाताहैयादोंकाकारवाँआगे
बसअगलेमोड़तलकहीयेसाफ़मंज़रहै
फिरउसकेबा'दवहीबे-कराँधुआँआगे
  - Qamar Siddiqi
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