us ki yaad ka itr laga kar niklaa tha | उस की याद का इत्र लगा कर निकला था

  - Qamar Naqvi
उसकीयादकाइत्रलगाकरनिकलाथा
क्यासौदामैंसरमेंलेकरनिकलाथा
सुब्हकेसूरजकाचेहराथारख़्शंदा
रातकेख़ूँकाग़ाज़ामलकरनिकलाथा
जानेक्यूँअपनेकोशीशाजानाफिर
ख़ुदहीहाथमेंसंगउठाकरनिकलाथा
उसनेराहकेसारेपत्थरतोड़दिए
वोजोपहलीठोकरखाकरनिकलाथा
रंगीनीऔरख़ुशबूमुझपरक़ुर्बांथी
उसकाक़सीदाजबमैंपढ़करनिकलाथा
जानेइंसाँनेक्यासोचाहोगाजब
सूरजपहलीबारफ़लकपरनिकलाथा
दौर-ए-ख़िज़ाँकेख़त्मकायूँँएलानहुआ
ताज़ापत्ताशाख़-ए-शजरपरनिकलाथा
  - Qamar Naqvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy