us ko nazaana-e-jaan pesh kiya hai main ne | उस को नज़राना-ए-जाँ पेश किया है मैं ने

  - Qamar Anjum
उसकोनज़राना-ए-जाँपेशकियाहैमैंने
यूँँसुबूतअपनीवफ़ाओंकादियाहैमैंने
मिरेदामन-ए-सद-चाकपेहँसनेवाले
यादकरतेरागरेबाँभीसियाहैमैंने
ख़ुद-कुशीकीमिरेदिलनेमुझेदीहैतर्ग़ीब
जबकिसीग़ैरकाएहसानलियाहैमैंने
ग़ैरत-ए-इश्क़कोपामालहोनेदूँगा
ज़िंदगीतुझसेयहीअहदकियाहैमैंने
मिरीख़ाक-ए-वतनतुझसेमैंशर्मिंदानहीं
बारहाअपनालहूतुझकोदियाहैमैंने
यूँँतोमरनेकेलिएज़हरपियाजाताहै
ज़िंदगीतेरेलिएज़हरपियाहैमैंने
ज़िंदगीमुझसेबचानेलगीदामन'अंजुम'
जबग़म-ए-दिलकोफ़रामोशकियाहैमैंने
  - Qamar Anjum
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