jazba-e-ishq ka izhaar na hone paa.e | जज़्बा-ए-इश्क़ का इज़हार न होने पाए

  - Qamar Anjum
जज़्बा-ए-इश्क़काइज़हारहोनेपाए
हुस्नरुस्वासर-ए-बाज़ारहोनेपाए
मुद्दतोंमहफ़िल-ए-साक़ीमेंरहेहैंलेकिन
जामछूनेकेगुनहगारहोनेपाए
बज़्म-ए-अहबाबमेंआयाहूँमगरडरयेहै
कोईफ़ित्नापस-ए-दीवारहोनेपाए
आओता'मीरकरेंऐसामोहब्बतकामकान
वक़्तकेहाथोंजोमिस्मारहोनेपाए
जिनकेसीनोंमेंमोहब्बतकीकिरनथी'अंजुम'
ख़्वाहिशोंमेंवोगिरफ़्तारहोनेपाए
  - Qamar Anjum
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy