kya aa ke jahaan men kar ga.e ham | क्या आ के जहाँ में कर गए हम

  - Qalaq Merathi
क्याकेजहाँमेंकरगएहम
इकदाग़जिगरपेधरगएहम
मेहमान-ए-जहाँथेएकशबके
शामआएथेऔरसहरगएहम
जूँशम्अ'तमामउम्ररोए
हरबज़्मसेचश्म-ए-तरगएहम
अपनीहीनज़रनहींवगर्ना
तूहीथाउधरजिधरगएहम
नालेमेंअसरतोक्यूँँहोता
परतेरालिहाज़करगएहम
हमजानतेहैंकितूहैहममें
गोढूँडनेदर-ब-दरगएहम
झगड़ाथाजोदिलपेउसकोछोड़ा
कुछसोचकेसुल्हकरगएहम
इसदश्तकेख़ार-ओ-ख़ससेबचकर
जोंबाद-ए-सुबुकगुज़रगएहम
थींलुत्फ़सेदिलमेंजुरअतेंकुछ
परतेरेग़ज़बसेडरगएहम
हसरतहीसेहमबनेथेगोया
आँखउठतेहीउठतेमरगएहम
देरीनारफ़ीक़था'क़लक़'हाए
वोक्याहीमुआकिमरगएहम
  - Qalaq Merathi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy