kyun na afsaana-e-gham kaif ka unwaan thehre | क्यूँँ न अफ़्साना-ए-ग़म कैफ़ का उनवाँ ठहरे

  - Qaisar Siddiqi
क्यूँँअफ़्साना-ए-ग़मकैफ़काउनवाँठहरे
शिद्दत-ए-दर्दहीजबदर्दकादरमाँठहरे
जिसजगहहमसाकोईचाक-ए-गरेबाँठहरे
शौक़सेकेवहाँफ़स्ल-ए-बहाराँठहरे
उसकेदामनकीतरफ़हाथबढ़ाऊँकैसे
जिसकेदामनकीमहकशो'लगी-ए-जाँठहरे
मंज़िलेंआतीहैंऔरकेगुज़रजातीहैं
देखिएजाकेकहाँक़ाफ़िला-ए-जाँठहरे
पिछलेवा'देजोनहींयादतोक्याबातहुई
फिरकोईअहद-ए-वफ़ाफिरकोईपैमाँठहरे
आपकोदेखूँतोहोदूरमिरीतिश्ना-लबी
आपजाएँतोजज़्बातकातूफ़ाँठहरे
शोख़ी-ए-दस्त-ए-सबासतोकोईकुछकहे
मेरेसरतोहमत-ए-गेसू-ए-परेशाँठहरे
  - Qaisar Siddiqi
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