har chand ki ghalib ke taraf-daar bahut hain | हर चंद कि ग़ालिब के तरफ़-दार बहुत हैं

  - Qadir Khan Sartaj
हरचंदकिग़ालिबकेतरफ़-दारबहुतहैं
लेकिनयेमिरेदोस्तपुर-असरारबहुतहैं
जमतीहुईदेखीहैहथेलीपेभीसरसों
येलोगज़मानेकेतोफ़नकारबहुतहैं
शर्मिंदा-ए-एहसासहोगर्दिश-ए-दौराँ
बर्बादी-ए-जाँकोतोमिरेयारबहुतहैं
येअक़्लकहेराह-ए-मुलाक़ातनहींहै
दिलहमसेकहेइसबरसआसारबहुतहैं
कुछउनकेलिएहाथउठाऔरदु'आकर
‘सरताज’तिरेइनदिनोंबीमारबहुतहैं
  - Qadir Khan Sartaj
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