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Qadeer Asad
jaane phir raushni ka kya hota
jaane phir raushni ka kya hota | जाने फिर रौशनी का क्या होता
- Qadeer Asad
जाने
फिर
रौशनी
का
क्या
होता
तुम
अगर
रौशनी
में
आजाते
- Qadeer Asad
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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इस
लिए
रौशनी
में
ठंडक
है
कुछ
चराग़ों
को
नम
किया
गया
है
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदा
हूँ
इस
तरह
कि
ग़म-ए-ज़िंदगी
नहीं
जलता
हुआ
दिया
हूँ
मगर
रौशनी
नहीं
Behzad Lakhnavi
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तो
देख
लेना
हमारे
बच्चों
के
बाल
जल्दी
सफ़ेद
होंगे
हमारी
छोड़ी
हुई
उदासी
से
सात
नस्लें
उदास
होंगी
Danish Naqvi
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इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
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अब
हवाएँ
ही
करेंगी
रौशनी
का
फ़ैसला
जिस
दिए
में
जान
होगी
वो
दिया
रह
जाएगा
Mahshar Badayuni
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ज़ेहनियत
को
साफ़
रखना
सीखिए
लड़कियाँ
यूँँ
भी
तो
हँसती-बोलती
हैं
Pratap Somvanshi
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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अज़
कबीर-ओ-रंग-ए-केसर
और
गुलाल
अब्र
छाया
है
सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल
Faez Dehlvi
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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ज़रा
देखो
तो
सादा
लौही
मेरी
यक़ीं
तुम
पे
दुबारा
कर
रहा
हूँ
Qadeer Asad
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हम
से
अश्क
सवाली
हैं
दिल
के
हुए
हैं
टुकड़े
क्यूँँ
Qadeer Asad
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क्यूँँ
कर
इस
के
पीछे
भागें
हम
को
कहाँ
दरकार
है
दुनिया
Qadeer Asad
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हिक़ारत
से
मिला
एज़ाज़
हम
ठोकर
पे
रखते
हैं
मुहब्बत
से
कोई
दे
दे
तो
फिर
ख़ैरात
चलती
है
Qadeer Asad
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तुम
अचानक
जो
बदल
जाते
हो
इतने
चेहरे
कहाँ
से
लाते
हो
Qadeer Asad
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