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Parvez Shaikh
mirii aabroo ka tamasha kiya hai kisi ne
mirii aabroo ka tamasha kiya hai kisi ne | मिरी आबरू का तमाशा किया है किसी ने
- Parvez Shaikh
मिरी
आबरू
का
तमाशा
किया
है
किसी
ने
सरे
आम
मुझको
शनासा
किया
है
किसी
ने
- Parvez Shaikh
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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रंग-ओ-रस
की
हवस
और
बस
मसअला
दस्तरस
और
बस
यूँँ
बुनी
हैं
रगें
जिस्म
की
एक
नस
टस
से
मस
और
बस
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Ammar Iqbal
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बा-हुनर
होके
कुछ
न
कर
पाना
रेज़ा-रेज़ा
बिखर
के
ढेह
जाना
मुझको
बेहद
उदास
करता
है
ख़ास
लोगों
का
आम
रह
जाना
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Vishal Bagh
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तुम
वो
लड़की
मुझे
लगती
तो
नहीं
आम
गोपी
से
जो
राधा
हो
जाए
Shariq Kaifi
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मोहब्बतों
में
बहुत
रस
भी
है
मिठास
भी
है
हमारे
जीने
की
बस
इक
यही
असास
भी
है
Akhtar Amaan
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तुम
अगर
सीखना
चाहो
मुझे
बतला
देना
आम
सा
फ़न
तो
कोई
है
नहीं
तोहफ़ा
देना
Jawwad Sheikh
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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मोहब्बत
आम
सा
इक
वाक़िआ'
था
हमारे
साथ
पेश
आने
से
पहले
Sarfraz Zahid
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ख़ुद
जिसे
मेहनत
मशक़्क़त
से
बनाता
हूँ
'जमाल'
छोड़
देता
हूँ
वो
रस्ता
आम
हो
जाने
के
बाद
Jamal Ehsani
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कुछ
नहीं
हो
सका
वैसे
अब
क्या
करूँँ
जीत
के
हारा
मैं
कैसे
अब
क्या
करूँँ
होना
जो
था
वहीं
हो
गया
मेरे
साथ
गिर
के
यूँँ
तो
उठा
जैसे
अब
क्या
करूँँ
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Parvez Shaikh
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बदल
वो
गुनाहों
का
पाएगा
अपने
जो
करता
नहीं
है
नदामत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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कुछ
भी
अच्छा
नहीं
हुआ
मिरे
साथ
जब
से
तू
ने
किया
गिला
मिरे
साथ
सोचता
था
कि
वो
मिरा
हैं
फ़क़त
जिस
ने
अच्छा
नहीं
किया
मिरे
साथ
उस
को
मालूम
था
ग़रीब
हूँ
मैं
इश्क़
का
ढोंग
क्यूँ
रचा
मिरे
साथ
तुम
पर
अब
प्यार
आ
रहा
है
मुझे
कुछ
तो
कर
दीजिए
बुरा
मिरे
साथ
सब
ने
परवेज़
से
नज़र
फेरी
वो
अकेला
था
जो
हँसा
मिरे
साथ
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Parvez Shaikh
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मिली
ना
किसी
से
मुहब्बत
कभी
भी
पड़ी
ना
किसी
की
ज़रूरत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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यहीं
डूब
जाने
को
जी
चाहता
है
यूँँ
आँसू
बहाने
को
जी
चाहता
है
नहीं
है
जहाँ
में
हमारा
कोई
अब
हमें
मुस्कुराने
को
जी
चाहता
है
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Parvez Shaikh
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