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Prince Jhankra
ik aisa chashma hai jo dhundhlaa hi rehta hai
ik aisa chashma hai jo dhundhlaa hi rehta hai | इक ऐसा चश्मा है जो धुँधला ही रहता है
- Prince Jhankra
इक
ऐसा
चश्मा
है
जो
धुँधला
ही
रहता
है
माँ
की
आँखों
में
बच्चा
दुबला
ही
रहता
है
- Prince Jhankra
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माँ
की
दु'आ
न
बाप
की
शफ़क़त
का
साया
है
आज
अपने
साथ
अपना
जनम
दिन
मनाया
है
Anjum Saleemi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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आज
फिर
माँ
मुझे
मारेगी
बहुत
रोने
पर
आज
फिर
गाँव
में
आया
है
खिलौने
वाला
Nawaz Zafar
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खिलौनों
की
तरफ़
बच्चे
को
माँ
जाने
नहीं
देती
मगर
आगे
खिलौनों
की
दुकाँ
जाने
नहीं
देती
Munawwar Rana
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इक
लड़की
है
जो
इकदम
घर
जैसी
है
वो
बिल्कुल
माँ
जैसी
बातें
करती
है
Siddharth Saaz
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बोझ
उठाए
हुए
फिरती
है
हमारा
अब
तक
ऐ
ज़मीं
माँ
तिरी
ये
उम्र
तो
आराम
की
थी
Parveen Shakir
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किताबों
से
निकल
कर
तितलियाँ
ग़ज़लें
सुनाती
हैं
टिफ़िन
रखती
है
मेरी
माँ
तो
बस्ता
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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घर
लौट
के
रोएँगे
माँ
बाप
अकेले
में
मिट्टी
के
खिलौने
भी
सस्ते
न
थे
मेले
में
Qaisar-ul-Jafri
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आज
फिर
बेटे
को
माँ
जाहिल
लगी
है
सोचिए
क्या
सीखा
हमने
डिग्रियों
से
Neeraj Neer
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उम्र
लंबी
कर
चुके
हैं
पार
हम
पर
उसी
से
कर
रहे
हैं
प्यार
हम
फूल
ही
थे
मौसमों
ने
कर
दिए
आज
सूखे
और
कांटेदार
हम
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Prince Jhankra
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झूठ
कह
दे
ख़्वाब
में
तू
आएगी
इस
बहाने
नींद
तो
आ
जाएगी
Prince Jhankra
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बारीकी
से
सोचूँ
मैं
तो
कितनी
ऐसी
बातें
थीं
पी
जाता
था
मैं
वो
बातें
जिन
बातों
पर
लड़ना
था
मैं
रिश्ते
की
बात
हमारे
घर
में
लाने
वाला
था
सब
अच्छा
हो
जाना
था
पर
तुमको
यार
बिछड़ना
था
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Prince Jhankra
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हम
दोनों
जब
भी
मिलने
को
जाते
थे
आने
जो
लगते
थे
तो
रो
जाते
थे
अब
तो
प्रेमी
रोज़ाना
मिल
लेते
हैं
हमको
कितने
कितने
दिन
हो
जाते
थे
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Prince Jhankra
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सोचते
हो
क्या
दिया
है
आपको
एक
दिन
फ़ुरसत
नहीं
है
बाप
को
Prince Jhankra
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