मुकम्मलसीग़ज़लमेंदर्देदिलशामिलज़रूरीहै
मुहब्बतसेभरेअश'आरहोंकाबिलज़रूरीहै
सफ़रयेज़िन्दगीकामुश्किलोंसेहीचलाकरता
डगरकाँटोंभरीचाहेमिलेंमंज़िलज़रूरीहै
समुंदरकीनजानेकोईगहराईजहाँभरमें
मचलतीसीयेजोलहरेंमिलेंसाहिलज़रूरीहै
ज़मानेमेंफ़रेबीऔरझूठोंकाठिकानासा
बशरजीनेकीहीख़ातिरबनेफ़ाज़िलज़रूरीहै
ख़ुदानेबख़्शीजोयेनेमतेंहमकोहैसारीही
ख़ुदाईपानेकोचलबननाफिरकामिलज़रूरीहै