zaroorat hi na haal-e-dil kisi ko bhi bataane kii | ज़रूरत ही न हाल-ए-दिल किसी को भी बताने की

  - Harpreet Kaur
ज़रूरतहीहाल-ए-दिलकिसीकोभीबतानेकी
हैआदतपीठपीछेसबकोयूँँखिल्लीउड़ानेकी
करेंबातेंज़मानाअपनेहक़भरकीहीहरदमयूँँ
कहाँफ़ुर्सतकिसीकोफ़र्ज़भीअपनेनिभानेकी
रहेंमसरूफ़पापीपेटकीख़ातिरयेदुनियाअब
सभीकीआरज़ूहैबसबहुतपैसाकमानेकी
गुज़रतीज़िन्दगीयेओढ़जिम्मेदारीकीचादर
नहींचाहतरहीआँखोंमेंख़्वाबोंकोसजानेकी
फ़सानाभरमुहब्बत'प्रीत'कीकोईअगरमाने
ग़ज़लऔरशा'इरीबातेंयेतोलिखनेलिखानेकी
  - Harpreet Kaur
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