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Praveen Bhardwaj
theek hain khafa hona juda hona theek nahin hai
theek hain khafa hona juda hona theek nahin hai | ठीक हैं ख़फ़ा होना जुदा होना ठीक नहीं है
- Praveen Bhardwaj
ठीक
हैं
ख़फ़ा
होना
जुदा
होना
ठीक
नहीं
है
इश्क़
होना
ठीक
हैं
ख़ुदा
होना
ठीक
नहीं
है
- Praveen Bhardwaj
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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बैठा
हूँ
अभी
सामने
और
सोच
रहा
हूँ
इज़हार
पे
मेरे
भला
क्या
मेरा
बनेगा
Afzal Ali Afzal
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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ऐ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
हाँ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज
एक
सितमगर
को
हँस
हँस
के
रुलाना
है
Jigar Moradabadi
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यूँँ
कहें
नुमाइशों
के
दिन
क़रीब
आ
गए
महज़
फ़रवरी
हो
किस
तरह
महीना
इश्क़
का
Neeraj Neer
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कॉलिज
में
इतवार
से
चिढ़
ने
वाला
इश्क़
ऑफ़िस
में
इतवार
की
राहें
तकता
है
Kumar Kaushal
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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तुमको
नज़र
अंदाज़
करता
ज़िंदगी
में
करता
नइँ
तुम
कर
रहे
जो
इश्क़
में
मैं
दुश्मनी
में
करता
नइँ
Praveen Bhardwaj
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कुछ
न
कुछ
हो
जाता
हैं
सबका
यहाँ
आख़िर
में
इस
बात
पे
क्या
मरना
तेरे
बाद
में
मेरा
क्या
होगा
Praveen Bhardwaj
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तेरी
मर्ज़ी
थी
तू
चाहे
जो
बना
देता
मेरा
लेकिन
तूने
आदमी
तोड़
कर
पत्थर
नहीं
बनाना
था
Praveen Bhardwaj
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नहीं
मैं
रह
नहीं
सकता
यहीं
मैं
कह
नहीं
सकता
किनारा
है
तभी
हूँ
मैं
नहीं
तो
बह
नहीं
सकता
पुरानी
एक
इमारत
हूँ
कि
क्या
देखा
नहीं
मैंने
किसी
के
छोड़
जाने
से
तो
मैं
यूँँ
ढह
नहीं
सकता
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Praveen Bhardwaj
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मेरे
ग़म
किसने
देखें
हैं
मैंने
और
उसने
देखें
हैं
मेरी
आँखें
जान
गई
थी
उसने
क्या
सपने
देखें
हैं
मेरी
कीमत
उसका
होना
पैसे
तो
सबने
देखें
हैं
ऐसी
आँखें
ऐसा
चेहरा
ज़न्नत
थी
हमने
देखे
हैं
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Praveen Bhardwaj
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