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Praveen Bhardwaj
nahin vo main nahin jisko mila hain sabse zyaada ghaav
nahin vo main nahin jisko mila hain sabse zyaada ghaav | नहीं वो मैं नहीं जिसको मिला हैं सब सेे ज़्यादा घाव
- Praveen Bhardwaj
नहीं
वो
मैं
नहीं
जिसको
मिला
हैं
सब
सेे
ज़्यादा
घाव
किसी
के
दिल
निकाले
गए
किसी
की
जान
ले
ली
गई
- Praveen Bhardwaj
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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चोट
खाई
थी
एक
बार
मगर
उम्र
भर
को
बिखर
गए
हैं
हम
Munazzah Noor
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वो
बड़े
प्यार
से
कहते
हैं
कि
आप
अपने
हैं
और
अपनों
को
ही
तो
ज़ख़्म
दिए
जाते
हैं
Akash Rajpoot
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आज
फिर
नींद
को
आँखों
से
बिछड़ते
देखा
आज
फिर
याद
कोई
चोट
पुरानी
आई
Iqbal Ashhar
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अक्सर
ही
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाले
हैं
औरतें
पर
कितने
टूटे
मर्द
सँभाले
हैं
औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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मेरा
सबकुछ
भी
तेरे
लिए
काफ़ी
नहीं
था
तू
मेरे
लिए
काफ़ी
था,
मैं
काफ़ी
नहीं
था
इस
वजह
से
भी
रात
को
ढालना
पड़ा
था
चाँद
का
रौशन
होना
तुझे
काफ़ी
नहीं
था
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Praveen Bhardwaj
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चलो
बिछड़
जाते
हैं
अगर
यही
तेरी
चाहत
है
मैं
सही
तू
ग़लत
नहीं
अपनी-अपनी
किस्मत
है
जा
रहे
हो
तो
जाओ
भी
अबकी
तोहफ़ा
मत
देना
आख़िरी
दफ़ा
एक
सच
बोलो
मत
कहो
मुहब्बत
है
दिल
में
क्या
तककलुफ्
उसकी
कैसी
मज़बूरी
है
थोड़े
वक़्त
की
दूरी
क्या
ये
इश्क़
नहीं
ज़रूरत
है
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Praveen Bhardwaj
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दिल
में
अब
कोई
हरकत
नहीं
हैं
हमें
इश्क़
करने
की
फुरसत
नहीं
हैं
आदमी
माना
जाए
तो
काफ़ी
होगा
हमें
ख़ुदा
बनने
की
हसरत
नहीं
हैं
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Praveen Bhardwaj
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सिक्कें
के
दोनो
तरफ़
हैं
एक
ही
निशान
इस
जंग
में
हार
भी
जाएँ
तो
ग़म
नहीं
हैं
Praveen Bhardwaj
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तुमको
नज़र
अंदाज़
करता
ज़िंदगी
में
करता
नइँ
तुम
कर
रहे
जो
इश्क़
में
मैं
दुश्मनी
में
करता
नइँ
Praveen Bhardwaj
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