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Praveen Bhardwaj
is safar ke aakhir men bhi hain safar
is safar ke aakhir men bhi hain safar | इस सफ़र के आख़िर में भी हैं सफ़र
- Praveen Bhardwaj
इस
सफ़र
के
आख़िर
में
भी
हैं
सफ़र
कोई
मंज़िल
नहीं
कोई
ठिकाना
नहीं
इन
रास्तों
पर
मिली
बेसुमार
मुहब्बत
मुझे
अब
कुछ
और
कमाना
नहीं
शहर
वालों
भूल
जाओ
की
अब
लौटेंगे
हमें
इस
दफ़ा
गाँव
से
वापस
जाना
नहीं
- Praveen Bhardwaj
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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मानी
हैं
मैं
ने
सैकड़ों
बातें
तमाम
उम्र
आज
आप
एक
बात
मेरी
मान
जाइए
Ameer Minai
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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दिल-ए-नादाँ
तुझे
हुआ
क्या
है
आख़िर
इस
दर्द
की
दवा
क्या
है
Mirza Ghalib
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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इतना
देर
मत
कर
की
वज़ह
ढूंढ
ले
हम
इस
भीड़
में
अपनी
भी
जगह
ढूंढ
ले
हम
जंग
तुझ
सेे
हैं
तो
हार
क्या
और
जीत
क्या
ऐसी
क्या
खुदगर्ज़ी
की
फ़तह
ढूंढ
ले
हम
तेरी
तौर-ए-ज़िंदगी
से
एक
शिकायत
हैं
मेरी
पुराना
घर
छोड़
नया
किस
तरह
ढूंढ
ले
हम
ये
रिश्ता
यहाँ
तक
हैं
तो
बस
यहीं
तक
रहे
आख़िरी
वक़्त
क्यूँ
कोई
जिरह
ढूंढ
ले
हम
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Praveen Bhardwaj
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नहीं
मैं
रह
नहीं
सकता
यहीं
मैं
कह
नहीं
सकता
किनारा
है
तभी
हूँ
मैं
नहीं
तो
बह
नहीं
सकता
पुरानी
एक
इमारत
हूँ
कि
क्या
देखा
नहीं
मैंने
किसी
के
छोड़
जाने
से
तो
मैं
यूँँ
ढह
नहीं
सकता
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Praveen Bhardwaj
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हो
गई
है
सुलह
सब
अब
शा'इरी
होगी
नहीं
मोम
सारा
जल
गया
अब
रौशनी
होगी
नहीं
क्या
लगा
है
मैं
भी
उनके
आस्तीं
का
साँप
हूँ
यार
देखो
हम
सेे
उनकी
मुख़बरी
होगी
नहीं
इश्क़
में
हम
पर
हुआ
है
इक
सितम
ऐसा
की
अब
दुश्मनी
हो
जाएगी
पर
दोस्ती
होगी
नहीं
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Praveen Bhardwaj
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मेरा
सबकुछ
भी
तेरे
लिए
काफ़ी
नहीं
था
तू
मेरे
लिए
काफ़ी
था,
मैं
काफ़ी
नहीं
था
इस
वजह
से
भी
रात
को
ढालना
पड़ा
था
चाँद
का
रौशन
होना
तुझे
काफ़ी
नहीं
था
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Praveen Bhardwaj
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वो
इश्क़
में
भी
रहते
हैं
जो
होश
में
कहते
हैं
झूठ
उनको
मोहब्बत
है
नहीं
Praveen Bhardwaj
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