hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Praveen Bhardwaj
ek roz sabhi ko mar jaana hai jaanaan
ek roz sabhi ko mar jaana hai jaanaan | एक रोज़ सभी को मर जाना है जानाँ
- Praveen Bhardwaj
एक
रोज़
सभी
को
मर
जाना
है
जानाँ
उस
सेे
पहले
मुझे
घर
जाना
है
जानाँ
तुझे
करनी
है
मुहब्बत
तो
आज
कर
वक़्त
हाथो
से
बिखर
जाना
हैं
जानाँ
मेरे
खौफ़
की
शाम
ख़त्म
होने
को
है
इसके
बाद
तुझे
डर
जाना
हैं
जानाँ
- Praveen Bhardwaj
Download Ghazal Image
रुके
रुके
से
क़दम
रुक
के
बार
बार
चले
क़रार
दे
के
तिरे
दर
से
बे-क़रार
चले
Gulzar
Send
Download Image
36 Likes
पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
64 Likes
कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
Read Full
Farhat Abbas Shah
Send
Download Image
34 Likes
आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
14 Likes
मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
Read Full
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
46 Likes
अक्स-दर-अक्स
बिखरना
है
मुझे
जाने
क्या
टूट
गया
है
मुझ
में
Khalid Moin
Send
Download Image
22 Likes
तेरे
दर
से
जब
उठ
के
जाना
पड़ेगा
ख़ुद
अपना
जनाज़ा
उठाना
पड़ेगा
Khumar Barabankvi
Send
Download Image
35 Likes
तो
क्या
उसको
मैं
होंठों
से
बजाऊँ
तिरे
दर
पे
जो
घंटी
लग
गई
है
चराग़
उसने
मिरे
लौटा
दिए
हैं
अब
उसके
घर
में
बिजली
लग
गई
है
Read Full
Fahmi Badayuni
Send
Download Image
45 Likes
ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
22 Likes
और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
Send
Download Image
14 Likes
Read More
सिक्कें
के
दोनो
तरफ़
हैं
एक
ही
निशान
इस
जंग
में
हार
भी
जाएँ
तो
ग़म
नहीं
हैं
Praveen Bhardwaj
Send
Download Image
2 Likes
ठीक
हैं
ख़फ़ा
होना
जुदा
होना
ठीक
नहीं
है
इश्क़
होना
ठीक
हैं
ख़ुदा
होना
ठीक
नहीं
है
Praveen Bhardwaj
Send
Download Image
7 Likes
ख़्वाब
ये
था
कि
रात
तेरी
बाहों
में
कटे
कुछ
इस
तरह
से
रात
मेरे
ख़्वाबों
में
कटे
Praveen Bhardwaj
Send
Download Image
1 Like
फूल
देखे
न
तितलियाँ
देखीं
जल
रही
मैंने
बस्तियाँ
देखीं
तीर
आँखों
में
मारता
कैसे
आँख
नइँ
मैंने
मछलियाँ
देखीं
हुस्न
पे
जिस
के
मरती
थी
दुनिया
उस
के
कानों
की
बालियाँ
देखीं
देख
जो
सकता
नइँ
था
ज़ख़्म-ए-दिल
सिर्फ़
उसने
ही
सिसकियाँ
देखीं
इन
दरख़्तों
के
पैर
छूटे
हैं
उम्र
भर
जिसने
आँधियाँ
देखीं
देखने
को
जो
कुछ
बचा
नइँ
तो
ख़ुद
में
दो-चार
ख़ामियाँ
देखीं
Read Full
Praveen Bhardwaj
Download Image
0 Likes
हमनें
कब
कहा
की
सफ़र
ख़ूब-सूरत
है
यार
ज़िंदगी
का
जन्नत
से
कोई
वास्ता
नहीं
Praveen Bhardwaj
Send
Download Image
2 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shohrat Shayari
Freedom Shayari
Justaju Shayari
Aasman Shayari
Kisaan Shayari