uski ulfat men chhupa pahl-e-baatil niklaa | उसकी उल्फ़त में छुपा पहलू-ए-बातिल निकला

  - Pratunj Anwar
उसकीउल्फ़तमेंछुपापहलू-ए-बातिलनिकला
मैंसमझताथामसीहाजिसे,क़ातिलनिकला
बातजबआईवफ़ादारीख़ुद्दारीकी
अन्जुमनमेंकोईअपनामुक़ाबिलनिकला
सिलसिलाजिसकाजुड़ारहताथातूफ़ानोंसे
डूबनेवालोंकेहक़मेंवहीसाहिलनिकला
जिनकोदावा-ए-ख़िरदमंदीथानादांनिकले
जिसकोदीवानासमझतेथेवोआक़िलनिकला
उसनेचाहतभरीनज़रोंसेमुझेजबदेखा
मुझकोऐसालगापहलूसेमिरादिलनिकला
उनकोसमझानाउन्हेंपानाउन्हेंअपनाना
कितनाआसाननज़रआताथा,मुश्किलनिकला
जिसकेचहरेपेलकीरेंथीवफ़ादारीकी
हाएवोचहराभीग़द्दारोंमेंशामिलनिकला
उम्रभरउसकेतजस्सुसमेंरहामैंअनवर
इसतगोदौकामगरकुछभीहासिलनिकला
  - Pratunj Anwar
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