jab dekha unki aankhoñ men mausam bahaar ke | जब देखा उनकी आँखों में मौसम बहार के

  - Prakash Pandey
जबदेखाउनकीआँखोंमेंमौसमबहारके
शौक़-ए-दिलयेरुख़देखूँकाग़ज़पेउतारके
मैंक्याकुछकहदूँउसइकआनकीनज़ाकतपे
झुकतीहैंउनकीनज़रेंजबमुझकोपुकारके
येसाज़-ए-लबहैंउनकेयाहैशीतरागिनी
छूकरजोऐसेगुज़रेहैंयेधुनसितारके
आहावोक्याशबवोमंज़रवोरंग-ए-अंदाज़
यूँँदेखेहैंजबवोमुझकोगेसूसँवारके
हैयेउनकावा'दाआएँगेआजनींदमें
परसोनेकीफ़ुर्सततोदेंयेदिनख़ुमारके
यारबलिखदेउनकीक़ुर्बतमेरेनसीबमें
मुश्किलहैजीनाऐसेतस्वीरेंनिहारके
  - Prakash Pandey
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