dekha jo husn to KHvaab ghazalon ke aate rahe | देखा जो हुस्न तो ख़्वाब ग़ज़लों के आते रहे

  - Prakash Pandey
देखाजोहुस्नतोख़्वाबग़ज़लोंकेआतेरहे
मतकरोइश्क़येहुस्नवालेसिखातेरहे
प्यारकीधुनलिएमैंचलाजबज़मानेमेंतो
दिलफ़क़तछोड़करलोगहरशयदिखातेरहे
हाथदोपाँवदोचारोंइनकेअलगकश्तीमें
औरहुनरदेखोयेकश्तीकोहीडुबातेरहे
रहाहैतरसइसज़मानेकेदीवानोंपे
येलुटातेरहेऔरवोआज़मातेरहे
जोहुआबे-वफ़ाईकाचर्चासर-ए-आमतो
रोदिएकुछतोकुछशक्लअपनीछुपातेरहे
  - Prakash Pandey
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