aati hai jab falak se sadaa koi rote hue | आती है जब फ़लक से सदा कोई रोते हुए

  - Prakash Pandey
आतीहैजबफ़लकसेसदाकोईरोतेहुए
चलतीहैतबहवाएकबारिशकोढोतेहुए
रहतीहैबे-हिसीऔरचुप-चापमैंबैठकर
आबकोदेखताहूँनिशाँकोईधोतेहुए
घरकेसबनूरकोखारहीहैंमिरीख़्वाहिशें
हरतरफ़याँअँधेराहैसूरजकेहोतेहुए
इसलिएभीनहींबुनतामैंख़्वाबइनरातोंमें
तकताहैरोज़येसहर-ए-ग़ममुझकोसोतेहुए
टूटाजबतारातोआँखेंहरएकनेमूँदलीं
कोईतोदेखताआसमाँकोभीरोतेहुए
  - Prakash Pandey
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy