wafaon ke na vaadon ke na qasmon ke zamaane hain | वफ़ाओं के, न वादों के, न क़समों के ज़माने हैं

  - Pradeep Rajput 'Mahir'
वफ़ाओंके,वादोंके,क़समोंकेज़मानेहैं
येसबझूठेबहानेहैंयेसबक़िस्सेपुरानेहैं
चलाहीजाऊँगाइसबज़्मसे,कुछदेरतोठहरूँ
अभीअपनेलिएउसआँखमेंआँसूकमानेहैं
तुझेभीइश्क़मेंहरगिज़नहींकुछनामकरनाहै
मुझेभीकोशिशेंकरकेकहाँपर्वतझुकानेहैं
ज़मानेसेनहींवाक़िफ़अभीनादानहूँमाना
मगरइकदिनसलीक़ेज़िन्दगीकेहीजानेहैं
चराग़ों!बुझरहेहोक्यूँतुम्हेंजलनासहरतकहै
अभीतोरातबाक़ीहैअभीकुछग़मभुलानेहैं
हवाओंमतबुझाओतुमदियामेरीउमीदोंका
भटकतेहैंमुसाफ़िरजोइसीरस्तेसेआनेहैं
भिगोनाछोड़करदामनकरोकुछयूँँमेरेअश्कों!
ज़राआतिशमेंढलजाओकिउसकेख़तजलानेहैं
तुम्हीं-तुमहोकहानीमेंहमारेनामपर'माहिर'
तुम्हारेनामपरदेखोयहाँकितनेफ़सानेहैं
  - Pradeep Rajput 'Mahir'
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